Saturday, 16 February 2013

हनुमानजी की उपासना से मिलेगा रोज़गार

योग्यता और अनुभव के अनुसार एक अच्छी नौकरी अथवा रोज़गार की अभिलाषा हर मनुष्य की होती है। इसके लिए वह प्रयास भी करता है। परन्तु कई बार अथक प्रयासों के बावजूद भी अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाती है। इस स्थिति में ईश्वर की शरण में जाकर प्रार्थना करके रोज़गार के लिए प्रयास किये जाते हैं।
 किसी मनुष्य की जन्म कुंडली में नौकरी का योग है अथवा स्व रोज़गार का, इस बात की जानकारी कुंडली के अध्ययन से की जा सकती है। वहीं तंत्र शास्त्र में दिए गए उपायों को करके नौकरी अथवा रोज़गार का सपना साकार किया जा सकता है।
रोज़गार प्राप्त करने के इच्छुक बेरोजगारों को प्रत्येक शनिवार के दिन मारुति नंदन हनुमानजी की उपासना करके सुन्दरकाण्ड का पाठ अवश्य करना चाहिए। हनुमानजी के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाकर लाल चन्दन अथवा मूंगा की माला की सहायता से एक सौ आठ बार '' कवन सो काज कठिन जग माहीं।जो नहीं होय तात तुम पाहीं।'' मन्त्र का जाप करना चाहिए। कार्य सिद्ध होने पर शनिवार के दिन सवा किलो बूंदी के लड्डू का भोग लगाकर वितरित कर देना चाहिए। घर पर भी प्रतिदिन इस मन्त्र का जाप करते रहने से शीघ्र फल की प्राप्ति होती है।
किसी नौकरी हेतु साक्षात्कार के लिए पूरी तैयारी करना बहुत आवश्यक है। साथ ही यदि उस दिन लाल चन्दन की माला से ग्यारह बार श्री गणेशजी की प्रतिमा अथवा चित्र के समक्ष '' ॐ वक्र्तुण्डाय हुं '' मन्त्र का जाप करके शुद्ध चित्त भाव से प्रार्थना की जाये तो बेरोजगारी की समस्या से छुटकारा मिल सकता है। श्री गणेशजी की आराधना करते समय भगवान शिव, माता पार्वती और नंदी देव का ध्यान  भी अवश्य करना चाहिए।--- प्रमोद कुमार अग्रवाल, फलित ज्योतिष और वास्तु सलाहकार 

Tuesday, 12 February 2013

देवी सरस्वती की उपासना से मिलता है

ज्ञानसमस्त ऋतुओं में वसंत को ऋतुओं का राजा माना गया है क्योंकि इस अवसर पर प्रकृति का अनुपम सौंदर्य समस्त प्राणियों के मन को मोह लेने वाला हो जाता है। खेतों में सरसों की स्वर्णिम रंगत, वृक्षों पर नई  कोपलों का आगमन और मौसम में हल्की सर्दी एवं गर्मी का मिला-जुला अहसास, आम्र मंजरी की अद्भुत सुगंध, बाग़-बगीचों में रंग-बिरंगे पुष्पों का अनुपम सौंदर्य तथा पक्षिओं का सुमधुर कलरव वसंत के माध्यम से शरीर में अजीब सी मादकता का अहसास कराता है।

वसंत पंचमी वाणी और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती तथा भगवान् विष्णु की आराधना का विशेष दिवस है। इस दिन प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल का उबटन लगाने के बाद स्नान किया जाना शुभ माना जाता है। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके भगवान् विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। वसंत पंचमी के दिन ब्राह्मण को भोजन कराने और पितृ तर्पण करने का भी विधान है। वसंत पंचमी के दिन विशेष रूप से माँ सरस्वती जी के पूजन को महत्त्व दिया गया है। छोटे बच्चों को अक्षर ज्ञान करने की शुरुआत भी इसी दिन से की जाती है। वाणी, ज्ञान एवं विद्या प्राप्त करने के लिए पीत रंग के वस्त्र पहन कर देवी सरस्वती जी की प्रतिमा अथवा चित्र पर पीले रंग के पुष्प, पीले रंग का चन्दन, धूप, दीप आदि के साथ अर्पण कर के शुद्ध चित्त भाव से '' ॐ एं सी क्लीं सरस्वत्यै  नमः '' मन्त्र का 108 बार जप करना चाहिए। इसके अलावा इस अवसर पर सरस्वती पूजन के साथ-साथ श्री गणेश, सूर्य देव, भगवान् शिव और विष्णु जी की भी आराधना करने से इन सभी की विशेष कृपा प्राप्तहोती है।
 वसंत पंचमी के  अवसर पर किसान खेतों से नया अनाज लाकर उसमें शुद्ध घी एवं मीठा मिला कर अग्नि देव को अर्पित करते हैं। ऐसी मान्यता है कि  इससे समस्त देव और पितृ गण तृप्त होकर अपना शुभ आशीर्वाद प्रदान करते हैं। देश के अनेक भागों में  वसंत पंचमी के दिन काम देव और रति की पूजा करके उन्हें प्रसन्न किया जाता है। ब्रज क्षेत्र में इस दिन से होली पर्व का शुभारम्भ हो जाता है जो फाल्गुन मॉस की पूर्णिमा तक सभी को स्नेह, प्रेम एवं सौहार्द  के रंगों में सराबोर कर देता है।
विचारों की पवित्रता, ज्ञान, विद्या और वाणी की शुद्धता के लिए माँ सरस्वती के प्रमुख श्लोक '' सरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने। विद्या रूपे विशालाक्षी विद्यां देहि नमोस्तुते। या देवी सर्वभूतेषु  विद्या रूपेण  संस्थिता। नमस्तस्यै  नमस्तस्यै  नमस्तस्यै  नमो नमः।'' का जप वसंत पंचमी के दिन 108 बार करना विशेष शुभ फलदायी होता है।--- प्रमोद कुमार अग्रवाल, फलित ज्योतिष और वास्तु सलाहकार 

Tuesday, 5 February 2013

अशुभ स्वप्न दिखायी दें तो जपें मन्त्र

शयन करने के उपरांत स्वप्न देखना मनुष्य के जीवन की सामान्य गतिविधियों में शामिल हैं। स्वप्न दिन अथवा रात्रि में कभी भी दिखायी दे सकते हैं। देखे गए स्वप्न अच्छे अथवा बुरे होते हैं, जिन्हें ज्योतिष शास्त्र की भाषा में शुभ अथवा अशुभ कहा जाता है। दिन में देखे गए गए स्वप्न फल रहित होते हैं परन्तु रात्रि के प्रथम पहर में जो स्वप्न दिखायी देते हैं, उनका शुभ या अशुभ प्रभाव एक वर्ष की अवधि में मिलता है। प्रातः काल में स्वप्न देखने के बाद यदि जातक जाग जाता है और दोबारा शयन नहीं करता तो उसके देखे गए स्वप्न शीघ्र  फलदायी माने जाते हैं। यदि रात्रि में जातक एक से अधिक स्वप्न देखता है तो उसका अंतिम स्वप्न ही फलदायी होता है। अस्वस्थ, रोगी, असंयमी, चिंता एवं उन्मादग्रस्त, मूत्र और शौच के वेग के अधीन देखे गए स्वप्न व्यर्थ होते हैं। 
शुभ तथा अशुभ स्वप्नों की अवधारणा देखे गए स्वप्न के प्रकार पर निर्भर होती है। स्वप्न में कबूतर, गिद्ध, श्वान, सियार, मुर्गा, बिलाव, सर्प, कबूतर, सूखा हुआ पेड़, पर्वत, पत्थर, शिखर, ध्वजा, भस्म एवं अंगारे, जल में डूबना, सूर्य या चन्द्र ग्रहण, सूखी नदी, दलदल, बंद द्वार, धुंआ, सुराही, केंची, काले वस्त्र धारण करने वाली महिला के साथ प्रेम प्रदर्शन, दांत  घिसना, हँसता हुआ साधू और सन्यासी, राक्षस की आकृति, मरण दृश्य, किसी वस्तु की चोरी, मिष्ठान और पकवान का सेवन करना आदि देखना अशुभ माना गया है। कहा जाता है कि  अशुभ स्वप्न देखने के बाद यदि जातक रात्रि में ही किसी को उस स्वप्न के बारे में बता दे तथा दोबारा शयन  करे तो ऐसा अशुभ स्वप्न जातक के लिए अनिष्टकारी नहीं होता है। प्रातः उठकर यदि अशुभ स्वप्न की चर्चा तुलसी के पौधे के समक्ष कर दी जाये तो भी उस अशुभ स्वप्न का दुष्प्रभाव नहीं होता है। 
यदि जातक अक्सर ही अशुभ स्वप्न देखता रहता है तो इसके निवारण के लिए अशुभ स्वप्न निवारण मन्त्र "" ॐ ह्वीं श्रीं क्लीं पूर्वदुर्गतिनाशिन्ये महामायाये स्वाहा "" का प्रतिदिन स्नान आदि करने के उपरांत शुद्ध चित्त भाव से कम से कम ग्यारह बार जाप करना चाहिए। इसके अलावा अशुभ स्वप्न से छुटकारा पाने के लिए श्री गजेन्द्रमोक्ष स्त्रोत का पाठ करना भी शुभ रहता है। रात्रि में शयन करने से पूर्व ईश्वर की आराधना करना और शांत चित्त होकर ध्यान लगाना भी जातक को अशुभ स्वप्न देखने से बचाता है।---- प्रमोद कुमार अग्रवाल, फलित ज्योतिष और वास्तु सलाहकार