Friday, 3 April 2015

चन्द्र ग्रहण और उसका प्रभाव

 चैत्र शुक्ल पूर्णिमा शनिवार विक्रम संवत 2072 अर्थात 04 अप्रैल 2015 को चन्द्र ग्रहण पड़ रहा है। यह ग्रहण एशिया के अधिकाँश भागों के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, उत्तर दक्षिण अमेरिका, भारतीय और पेसिफिक समुद्री क्षेत्रों में दिखाई देगा। भारत में यह चन्द्र ग्रहण आंशिक रूप से पूरे देश में नज़र आएगा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार जब राहु देव चन्द्रमा को ग्रसित करते हैं तो चन्द्र ग्रहण लगता है। इस वर्ष चन्द्र ग्रहण कन्या राशि में हस्त नक्षत्र में पड़ रहा है। यह संयोग पंद्रह वर्षों बाद पड़ने के कारण इस ग्रहण की विशेष चर्चा है। चन्द्र ग्रहण का असर राजनीति और प्रचार-प्रसार के कार्य से जुड़े लोगों पर प्रतिकूल असर रखने वाला है।ग्रहण के प्रभाव से प्राकृतिक आपदाएं, महगाई और कहीं-कहीं वाद-विवाद की स्थिति दिखाई दे सकती है। इसके साथ-साथ ही जिन जातकों पर शनि की साढ़े साती अथवा ढैया का असर है, जिन जातकों का चन्द्रमा नीच का या सुप्त अवस्था में है तथा जन्म कुंडली में चन्द्र ग्रह पहले, छठे, आठवें और बारहवें भाव में विराजमान है, उनके लिए भी चन्द्र ग्रहण की शुभ प्रभाव देने वाला नहीं माना जा सकता है। चन्द्र ग्रहण के प्रभाव से जातकों के मन की चंचलता पर भी विपरीत असर पड़ता है।
ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार चन्द्र ग्रहण का प्रारंभ दोपहर में 03:45 बजे से होगा, ग्रहण का मध्य काल सायं 05:30 बजे तथा ग्रहण का मोक्ष काल रात्रि 07:15 बजे पर होगा। चन्द्र ग्रहण से पूर्व सूर्योदय से पहले अर्थात प्रातः 03:46 बजे से सूतक लग जायेंगे। ग्रहण के सूतक काल में तथा ग्रहण के दौरान मंदिर में प्रवेश, मूर्ति स्पर्श, मूर्ति पूजा, भोजन, मैथुन, तेल मर्दन, उबटन, झूठ बोलना आदि कार्य निषिद्ध माने गए हैं। लेकिन वृद्ध, बच्चे और बीमार लोगों के लिए भोजन करना निषिद्ध नहीं माना गया है।  ग्रहण के सूतक और ग्रहण काल में स्नान, ध्यान, जप, तप, भजन, कीर्तन, मन्त्र अनुष्ठान, दान जैसे कार्य करना शुभ माना गया है। ऐसा करने से राहु देव प्रसन्न होते हैं और चंद्र ग्रह से संबंधित कष्टों का निवारण होता है।
चन्द्र ग्रहण के अशुभ प्रभाव को काम करने के लिए चंद्र ग्रह से संबंधित वस्तुओं जैसे मोती, चावल, चीनी, मिश्री श्वेत वस्त्र आदि का दान करना चाहिए।  चन्द्र देव से संबंधित मंत्र  "ॐ ऐं क्लीं सोम सोमाय नमः" का निरंतर जप करना चाहिए और भगवान शिव तथा श्री हनुमान जी की आराधना भक्ति भाव से करनी चाहिए। सुन्दरकाण्ड का नियमित पाठ करने से चंद्र ग्रह के साथ-साथ शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव भी काम होने लगते हैं।