Friday, 26 February 2016

ज्योतिष में पेड़-पौधों की उपयोगिता

 पर्यावरण को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाये रखने में वृक्षों का महत्वपूर्ण योगदान है। एक वृक्ष सौ पुत्रों से भी बढ़कर है क्योंकि वह जीवन भर अपने पालक को समान एवं निःस्वार्थ भाव से लाभ पहुंचाता रहता है। भविष्य पुराण के अनुसार संतानहीन मनुष्य द्वारा लगाया गया वृक्ष लौकिक और पारलौकिक कर्म करता है। लोमेश संहिता में कहा गया है कि जहां पर तुलसी का वृक्ष स्वयं उत्पन्न होता है तथा निंब, अश्वत्थ आदि के वृक्ष हों, वहां निश्चित ही देवता निवास करते हैं। आचार्य वराहमिहिर ने वृक्षों को वस्त्र से ढककर चंदन और पुष्पमाला अर्पित कर उनके नीचे हवन करने को श्रेष्ठ बताया है। पितरों की संतुष्टि के लिए भी वृक्ष लगाने की परंपरा है।
ज्योतिष में वृक्ष 
ज्योतिष शास्त्र में वृक्षों को देवताओं और ग्रहों के निमित्त लगाकर उनसे शुभ लाभ प्राप्त किये जाने का उल्लेख मिलता है। पीपल के वृक्ष में सभी देवताओं का तो आंवला और तुलसी में विष्णु का, बेल और बरगद में भगवान शिव का जबकि कमल में महालक्ष्मी का वास माना गया है। जामुन का वृक्ष धन दिलाता है तो पाकड़ ज्ञान और सुयोग्य पत्नी दिलाने में मदद करता है। बकुल को पापनाशक, तेंदु को कुलवृद्धि, अनार को विवाह कराने में सहायक और अशोक को शोक मिटाने वाला बताया गया है। श्रद्धा भाव से लगाया गया वृक्ष कई मनोकामनाओं की पूर्ति करता है। कन्या के विवाह में देरी हो रही हो तो कदली वृक्ष की सूखी पत्तियों से बने आसान पर बैठकर कात्यायनी देवी की पूजा करने चाहिए। शनि ग्रह के अशुभ फल को दूर करने हेतु शमी वृक्ष के पूजन से लाभ मिलता है। कदंब व आंवला वृक्ष के नीचे बैठकर यज्ञ करने से लक्ष्मी जी कृपा मिलती है।
हवन समिधा हेतु वृक्ष 
नवग्रहों को प्रसन्न करने के लिए ज्योतिष में मंत्रजाप के साथ हवन किया जाता है। इस हेतु जिस समिधा का प्रयोग होता है वह वृक्ष से ही मिलती है। सूर्य के लिए मदार, चंद्र के लिए पलाश, मंगल के लिए खैर, बुध के लिए अपामार्ग, गुरु के लिए पीपल, शुक्र के लिए गूलर, शनि के लिए शमी, राहु के लिए दूर्वा और केतु के लिए कुश वृक्ष की समिधा प्रयुक्त होती है।
सही नक्षत्र में वृक्षारोपण और कृषि कार्य 
फसल की कटाई, मढ़ाई, बुवाई, हल जोतने, बीज डालने, वृक्ष लगाने तथा अन्य कृषि कार्यों के लिए ज्योतिष में कृत्तिका, मृगशिरा, श्लेषा, मघा, उत्तराषाढ़ श्रवण धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों को शुभ माना गया है।
 ग्रह शांति हेतु जड़ी बूटी 
अशुभ प्रभाव देने वाले ग्रहों की शांति और प्रसन्नता के लिए ज्योतिष में रत्नों के स्थान पर जड़ी बूटी धारण करने की सलाह दी जाती है जो वृक्षों से ही प्राप्त होती है। सूर्य के लिए बेलपत्र, चंद्र के लिए खजूर या खिरनी, मंगल के लिए अनंतमूल, बुध के लिए विधारा, गुरु के लिए भृंगराज, शुक्र के लिए अश्वगंध, शनि के लिए शमी, राहु के लिए श्वेत चंदन और केतु के लिए असगंध की जड़ को शुभ दिन और नक्षत्र में लाकर विधि-विधान से धारण कर सकते हैं।
स्वप्न विचार और वृक्ष 
स्वप्न में पेड़-पौधे, फल, पुष्प, पुष्पों की माला, गेंहू, जौ, सरसों, बेलपत्र आदि का दिखना राजपद, धन, सम्मान, और विद्या प्राप्ति का संकेत है , वहीँ स्वप्न में काला पुष्प, कपास और आक का वृक्ष देखना कष्टकर, रोगदायी एवं समस्याओं का संकेत  देता  है।
दान हेतु वृक्ष और उत्पाद 
ज्योतिष में नवग्रहों को प्रसन्न करने और उनके शुभ प्रभाव के लिए दान करना उपयुक्त उपाय है। इस हेतु वृक्ष और उनसे मिलने वाले उत्पादों का दान भी किया जाता है। सूर्य हेतु गेंहू, लाल कमल, चना, मसूर की दाल, गुड़, चंद्र हेतु चीनी, मैदा, सूजी, रसदार फल, मंगल हेतु गैंहू. मसूर, कनेर, मुनक्का, छुआरा, मोठ, बुध हेतु हरे फल और हरी सब्जियां, मूंग, हरी मटर, सौंफ, गुरु हेतु पीले फल, बेसन, प्याज,अदरक, शहद, हल्दी, चने की दाल, शुक्र के लिए चावल, मिश्री, रुई, कच्चा नारियल, शनि, राहु एवं केतु के लिए उड़द, काले तिल, जाता वाला नारियल, कली मिर्च आदि का दान किया जाता है।-- ज्योतिषविद प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा